Sunday, May 31, 2020

सोलर सिस्टम का सूरज

मैं अगर पृथ्वी हूं
है कौन मेरे 
सोलर सिस्टम का सूरज ?

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो एक चांद है मेरे पास
पर उसमे भी कुछ दाग है 

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो ये चांद घूमता है 
मेरे चारों तरफ

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो ये चांद मेरा
कभी आता, कभी जाता है

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो मैं घूमता हूं 
इर्द गिर्द तुम्हारे

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो मैं हूं कहीं ना कहीं तुमसे
तब जाके ये चांद है मुझसे 

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो मैं बंधा हूं 
ग्रेविटेशन से तुमसे

मैं अगर पृथ्वी हूं
तो तुम ही हो मेरे 
सोलर सिस्टम का  सूरज ।

- अंकित कोचर

Wednesday, May 27, 2020

कविता

कोई प्रेमिका अपने प्रेमी के दिल में नहीं रहती 
प्रेमिका तो प्रेमी के बटुए में फोटो बनकर 
या डायरी में कविता बनकर रहती है ।

विटामिन- डी

तुम अगर शरीर हो
और तुम्हे धूप पसंद नहीं है
क्यूंकि वो तुम्हारा साया बनाती है
और साए तुम्हारा पीछा करते है
पर तुम आज़ाद रहना चाहती हो
तुम सायों से भी पीछा छुड़ाना चाहती हो

तुम अगर शरीर हो
तो मैं उस शरीर पर गिरती धूप हूं
मैं वो धूप हूं जो एक प्यासे चुम्बन कि तरह 
इस शरीर को चूम लूंगा 
क्यूंकि तुम्हारे शरीर को छांव के साथ साथ
इस धूप के विटामिन डी की भी जरूरत है । 

- अंकित कोचर 

एहसास

ये कैसा एहसास है
दूर रहकर भी जैसे 
मेरे दिल के बहुत पास है 

जब दूर नहीं थे 
तो करीब आ ना सके
करीब आकर भी
तुम मुझमें,  मैं तुझमें  
हम बनकर समा ना सके
 
किसी रोज़ मिलते थे 
पर उस रोज़ मिलकर भी
ये एहसास पा ना सके 

ये कैसा एहसास है
दूर रहकर भी जैसे 
मेरे दिल के बहुत पास है ।

तेरी आंखो की वो गुस्ताखियां
तेरी जुल्फों की वो लहराना
तेरी एक झलक का वो पीछा करना
तेरे हाथो को  वो अपने हाथ में थामना
तेरा पलट के फिर वो रुक जाना
वो बारिश में पूरा भीग जाना 
जो कुछ भी है, वो सब कुछ
जो खट्टी मीठी तीखी  यादें 
जो समेट कर रखी है 
वो एक एहसास ही है

ये वो एहसास है
जो दूर रहकर भी
मेरे दिल के बहुत पास है ।

- अंकित कोचर