तुम अगर शरीर हो
और तुम्हे धूप पसंद नहीं है
क्यूंकि वो तुम्हारा साया बनाती है
और साए तुम्हारा पीछा करते है
पर तुम आज़ाद रहना चाहती हो
तुम सायों से भी पीछा छुड़ाना चाहती हो
तुम अगर शरीर हो
तो मैं उस शरीर पर गिरती धूप हूं
मैं वो धूप हूं जो एक प्यासे चुम्बन कि तरह
इस शरीर को चूम लूंगा
क्यूंकि तुम्हारे शरीर को छांव के साथ साथ
इस धूप के विटामिन डी की भी जरूरत है ।
- अंकित कोचर
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